



काफी पुरानी बात है हमारे दादा जी के पास एक बड़ा मकान था जिसके वो इकलौते वारिस थे, बच्चे छोटे थे इसलिए रहने के लिए काफी था। उसी बड़े मकान से सटे हुए हमारे दो छोटे मकान और थे जो खाली पड़े थे । एक दिन एक औरत अपने चार छोटे छोटे बच्चो के साथ […]
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कुमार कृष्णन विश्व योग पीठ के परमाचार्य परमहंस स्वामी निरंजनानंद सरस्वती ने कहा है कि वर्तमान मे मानव जीवन की सबसे मूल आवश्यकता है— स्वास्थ्य,शांति और सामंजस्य। इसे बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती है। नये — नये रोग जन्म ले रहें हैं। बच्चे तक इसका शिकार हो रहे हैं। वे मुंगेर दशभूजी स्थान में दो […]
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निमिषा सिंह बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर कहते थे “औरत किसी भी जाति की हो अपनी जाति में उसकी वही स्थिति होती है जो एक दलित औरत की समाज में”। मौजूदा समय में जहां गैर दलित स्त्रियां अपने अधिकारों के लिए पितृ सत्तात्मक समाज से लड़ रही हैं। आज भी दोयम दर्जे का जीवन जी रही […]
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