समय के साथ चलने वाला साहित्य ही जीवंत:द्बिवेदी

 

पटना। साहित्य एवं समाज संवर्धन को समर्पित राष्ट्रीय संस्था पुरवैया के राजधानी पटना प्रक्षेत्र के तत्वावधान में एक काव्य संध्या का आयोजन कुम्हरार, पटना में किया गया। राजधानी पटना क्षेत्र के अध्यक्ष गीतकार मधुरेश नारायण के संयोजन में आयोजित इस गोष्ठी की अध्यक्षता प्रख्यात साहित्यकार श्री भगवती प्रसाद द्विवेदी ने की।मुख्य अतिथि वरीय ग़ज़लकार प्रेम किरण जी रहे और विशिष्ट अतिथि मान्यवर राशदादा राश रहे।अपनी रचनाओं से कार्यक्रम को सफल बनाने वालों में,कमल किशोर,हरेंद्र सिन्हा ,सिद्धेश्वर, प्रभात कुमार धवन, रवि श्रीवास्तव ,पूनम कतरियार,डाँ. रूबी भूषण, सीमा रानी प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
पुरवैया के राष्ट्रीय संरक्षक डाँ. गोरख प्रसाद मस्ताना ने अपने संबोधन में पुरवैया के दायित्वों पर प्रकाश डाला। गोष्ठी में कवियों एवं कवयित्रियों ने अपने गीत ग़ज़लों से कार्यक्रम को गौरवपूर्ण बनाया जिसका संचालन सुविख्यात शायर नसीम अख्तर ने किया।
अध्यक्ष श्री द्बिवेदी ने अपने संबोधन में ऐसी गोष्ठी की जरूरत पर बल दिया।उन्होंने कहा इससे रचनाकार को सीखने समझने का मौका मिलता है।उन्होंने कहा समय के साथ चलने वाला रचनाकार ही जीवंत होता है।
धन्यवाद उपरांत राज्य के वरीय साहित्यकार और विचार दृष्टि, दिल्ली के संपादक व बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष सिद्धेश्वर प्रसाद के निधन पर दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी गयी।
प्रस्तुति_दुर्गेश मोहन
बिहटा, पटना (बिहार)

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