पांडिच्चेरी विश्वविद्यालय में भारतीय ज्ञान प्रणाली के अंतर्गत ‘पाणिनि और आधुनिक स्वनविज्ञान’ पर अंतरराष्ट्रीय व्याख्यान माला का आयोजन

 

पांडिच्चेरी विश्वविद्यालय के तत्वावधान में ‘भारतीय ज्ञान प्रणाली – भाषा चिंतन की भारतीय परंपरा’ (Indian Knowledge System – The Indian Tradition of Language Contemplation) पर अंतरराष्ट्रीय व्याख्यान शृंखला के अंतर्गत दिनांक 10 जुलाई 2025, गुरुवार के दिन पाणिनि और आधुनिक स्वनविज्ञान’ विषय पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया जा रहा है। इस अवसर पर साहित्य अकादमी-संस्कृति परिषद, मध्य प्रदेश के पूर्व निदेशक तथा रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय, जबलपुर के हिंदी एवं भाषाविज्ञान विभाग के पूर्व आचार्य एवं अध्यक्ष आचार्य त्रिभुवननाथ शुक्ल अपने विचार साझा करेंगे।

भारतीय ज्ञान प्रणाली विश्व की उन प्राचीनतम बौद्धिक परंपराओं में से एक है, जिसने भाषा, दर्शन, विज्ञान, चिकित्सा, गणित, कला आदि अनेक क्षेत्रों में गहन और व्यवस्थित चिंतन प्रदान किया है। विशेष रूप से भाषा चिंतन के क्षेत्र में भारत की परंपरा अत्यंत समृद्ध रही है, जिसका श्रेष्ठतम उदाहरण पाणिनि का अष्टाध्यायी व्याकरण है, जो आज भी विश्व में भाषाविज्ञान के अध्ययन के लिए एक मील का पत्थर माना जाता है। यह व्याख्यान आधुनिक स्वनविज्ञान (Phonetics) के आलोक में पाणिनि की ध्वनि-संरचना सम्बन्धी अवधारणाओं को पुनः समझने का एक सशक्त मंच प्रदान करेगा।  आचार्य त्रिभुवननाथ शुक्ल भारत के प्रमुख भाषाविदों में से एक हैं, जिन्होंने भारतीय भाषाविज्ञान, ध्वनिविज्ञान और भाषा-दर्शन के क्षेत्र में अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

यह व्याख्यान शृंखला विश्वविद्यालय के ‘SWAYAM’ मंच के भाषा प्रौद्योगिकी का परिचय पाठ्यक्रम के अंतर्गत आयोजित हो रही है। इस अंतरराष्ट्रीय व्याख्यान शृंखला की अध्यक्षता पांडिच्चेरी विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष एवं पाठ्यक्रम समन्वयक डॉ. सी. जय शंकर बाबु करेंगे।

ध्यान देने योग्य है कि डॉ. त्रिभुवननाथ शुक्ल भारत के सुप्रसिद्ध भाषाविद् हैं, जिन्होंने भाषाविज्ञान के क्षेत्र में 50 से अधिक महत्त्वपूर्ण पुस्तकें प्रकाशित की हैं और भारतीय भाषाविज्ञान की परंपरा को समकालीन विमर्शों से जोड़ा है। इस व्याख्यान कार्यक्रम का संचालन डॉ. आरती पाठक, सहायक आचार्य, हिंदी विभाग, कालिंदी महाविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा किया जाएगा। यह व्याख्यान सायं 6:00 बजे से गूगल मीट पर आयोजित होगा, जिसमें देश-विदेश से कोई भी अध्येता, विद्वान, भाषा चिंतक, विद्यार्थी, शिक्षक आदि भाग ले सकते हैं। इच्छुक प्रतिभागी निम्नलिखित लिंक के माध्यम से जुड़ सकते हैं: – https://meet.google.com/art-tauu-pmo

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