सुधीर राणा को शिक्षक श्री सम्मान

‘बुद्ध संस्कृति विश्वविद्यापीठ’ नजीबाबाद के कार्यालय पर संस्था के अध्यक्ष गोविंद सिंह बौद्ध ने राज्य सरकार द्वारा सम्मानित शिक्षक ‘सुधीर कुमार राणा’ को ‘शिक्षक श्री’ सम्मान से सम्मानित किया।
शिक्षक सुधीर कुमार राणा ने सम्मान प्राप्त करने के बाद संबोधित करते हुए कहा कि हम सरकार की योजना के तहत उन बच्चों को शिक्षित करते हैं जिनके परिवार भी शिक्षा से वंचित रहे हैं। प्राथमिक विद्यालय का अध्यापक अनगढ़ बच्चों को गढ़ता है। वंचितों को शिक्षा प्रदान करना कोई साधारण सेवा नहीं बल्कि सबसे बड़ी देश सेवा है इसलिए हमारा प्रयास होता है कि हम पूरे मनोयोग से देश का भविष्य बनाने का काम करें। संस्था के अध्यक्ष गोविंद सिंह ने कहा कि वर्तमान समाज में एकमात्र शिक्षा ही वह मध्यम है जो हमें न सिर्फ विकसित कर सकती है बल्कि एकजुट भी कर सकती है और तमाम भेदभाव को भी मिटा सकती है। सुधीर राणा जी को सम्मानित करते हुए हमें गर्व का अनुभव हो रहा है।
पत्रकार, लेखक एवं प्रकाशक अमन कुमार ने शिक्षा को सर्वोच्च बताते हुए कहा कि प्रत्येक नागरिक शिक्षित होना अनिवार्य है। यदि वह अपने कर्तव्यों और अधिकारों की रक्षा करना जान गया तो समझो वह देश की रक्षा करना भी सीख जाएगा। यदि हम शिक्षा के अभाव में मूर्ख बने घूमते रहेंगे तो हम कुछ भी नहीं कर पाएंगे, न अपनी रक्षा न अपने देश की रक्षा। दूसरी बात शिक्षा व्यक्ति को आत्मसंतुष्टि और शांति भी प्रदान करती है। जब सीखने की ललक हो तो विकास और धनार्जन स्वयमेव हो जाता है। किंतु शिक्षा प्राप्ति के पश्चात प्रत्येक नाागरिक को ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठ बने रहने की शपथ भी लेनी चाहिए। आज ऐसे लोग भी हैं जो शिक्षा प्राप्ति के बाद उच्च नौकरी में नियुक्ति के समय ली गई शपथ को कुछ ही समय बाद भूल जाते हैं। इसी प्रकार ईमानदारी का दंभ भरने वाले जनप्रतिनिधि की भ्रष्ट हो जाते हैं उन्हें पता ही नहीं चलता। इसलिए भी हर व्यक्ति को शिक्षा की आवश्यकता है ताकि वो भष्ट तंत्र से भी निपट सकें।
इस अवसर पर सौरभ भारद्वाज, मनोज गौतम, धर्मवीर सिंह, अमन त्यागी आदि सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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