व्यक्तित्व

व्यक्तित्व

सुप्रसिद्ध दार्शनिक एवं संन्यासी : स्वामी विवेकानंद

  भारतीय इतिहास में सुप्रसिद्ध दार्शनिक, संन्यासी ,विद्वान ,विचारक एवं साहित्यकार के रूप में मिली महत्वपूर्ण योगदान के लिए स्वामी विवेकानंद जाने जाते हैं। इनका मूल नाम नरेंद्र नाथ दत्त था। आपका जन्मदिन भारतीय इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित है ।आपका जन्म 12 जनवरी, 1863 को कोलकाता में हुआ था।भारतीय आपके जन्मदिन को राष्ट्रीय युवा […]

Read More
व्यक्तित्व

साहित्य के आधार स्तम्भ डॉ0 श्रीरंजन सूरिदेव

  भारतीय साहित्य गगन के आभामंडित, सुविख्यात एवं ज्ञान की किरणों को बिखेरती हुई पाठकों के अंतर्वृंद को झकझोरती हुई उसे आनंदित कर चार चांद लगा देने में सक्षम एवं सफल थे-हमारे प्यारे साहित्यकार डॉ0 श्रीरंजन सूरिदेव। डॉ. श्रीरंजन सूरिदेव का जन्म28 अक्टूबर ,1926 ईस्वी को शुंभेश्वर नाथ धौनी, दुमका में हुआ था। इनकी शिक्षा […]

Read More
व्यक्तित्व

यशवंत सिंह, जिस वैचारिक सत्ता की विरासत हैं, उसने भारतीय राजनीति में बेखौफ़ इंदिरा की तानाशाही का विरोध किया था

#जन्मदिन_पर_विशेष। @अरविंद सिंह जिस कालखंड में हमारी पीढ़ी की सियासी समझ और राजनीतिक चेतना का विस्तार हो रहा था, और नेताओं के दृश्य और अदृश्य चुंबकीय व्यक्तित्व एवं आभा मंडल के ज़द में जाने का दौर,एक परंपरा का रूप लेता जा रहा था। जिस व़क्त जेपी की ख़ुमारी और नशे के भावनात्मक वाष्प में पिघलती […]

Read More
व्यक्तित्व

भाषाई संस्कारों के कोश थे साहित्यकार त्रिलोचन

  ■ डॉ. सम्राट् सुधा मेरा यह सौभाग्य रहा कि प्रगतिवादी काव्य के स्तंभ-कवि त्रिलोचन से मैं जीवन में तीन बार मिल सका। इनमें 28 अक्टूबर, 2001 की भेंट तो नितान्त औपचारिक ही थी, जब रुड़की की एक संस्था के निवेदन पर मैं उन्हें लेने ज्वालापुर ( हरिद्वार ) गया था। फिर ,जून 2005 से […]

Read More
व्यक्तित्व

तुलसीदास : रामकथा के जनसुलभ प्रस्तोता

      * डॉ. सम्राट् सुधा   किंवदंतियों के अनुसार, बारह महीने तक माता के गर्भ में रहने वाले तुलसी ने जन्म लेते ही राम-नाम का उच्चारण किया था। रामकथा को बनाया जनसुलभ ————– प्रभु श्रीराम की कथा को जन-सुलभ बनाने के लिए तुलसीदास ने रामचरितमानस की रचना की। इसके माध्यम से उन्होंने संपूर्ण […]

Read More
व्यक्तित्व

पंडित गौरीदत्त (1836 – 8 फ़रवरी 1906)

पंडित गौरीदत्त का जन्म पंजाब प्रदेश के लुधियाना नामक नगर में सन् 1836 में हुआ था। आपके पिता पंडित नाथू मिश्र प्रसिद्ध तांत्रिक और सारस्वत ब्राह्मण थे। आपकी प्रारम्भिक शिक्षा साधारण ही हुई थी। केवल पंडिताई का कार्य करने तक ही वह सीमित थी। जब आपकी आयु केवल 5 वर्ष की ही थी तब आपके […]

Read More
व्यक्तित्व

प्रकाशवीर शास्त्री

प्रकाशवीर शास्त्री (30 दिसम्बर 1923 – 23 नवम्बर 1977) भारतीय संसद के सदस्य तथा आर्यसमाज के नेता थे। उनका मूल नाम ‘ओमप्रकाश त्यागी’ था। वे एक प्रखर वक्ता थे। उनके भाषणों में तर्क बहुत शक्तिशाली होते थे। उनका भाषण सुनने के लिये लोग दूर-दूर से पैदल चलकर आ जाते थे। उनके विरोधी भी उनके प्रशंसक […]

Read More
व्यक्तित्व

महेंद्र अश्क को शायरी का शौक़ जूनून की हद तक था

अल्लाह मेरी फ़िक्र को इतनी रसाई दे/ मैं देखने लगू तो मदीना दिखाई दे। यह शेर किसी मुस्लिम शायर का नहीं बल्कि आलमी शौहरत याफ्ता शायर महेन्द्र सिंह अश्क का है।अश्क साहब ने शायरी खास तौर से नात गोई में बहुत नाम कमाया। एक ज़माना था,जब बड़े मुशायरो की फहरिस्त में बेकल उत्साही,जिगर मुरादाबादी,खुमार बारा […]

Read More
व्यक्तित्व

चन्द्रशेखर आज़ाद

  चन्द्रशेखर ‘आजाद (23 जुलाई 1906 — 27 फ़रवरी 1931) भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के स्वतंत्रता सेनानी थे। वे शहीद राम प्रसाद बिस्मिल व शहीद भगत सिंह सरीखे क्रान्तिकारियों के अनन्यतम साथियों में से थे। सन् 1922 में गाँधीजी द्वारा असहयोग आन्दोलन को अचानक बन्द कर देने के कारण उनकी विचारधारा में बदलाव आया और वे […]

Read More
व्यक्तित्व

बाल गंगाधर तिलक

  बाल गंगाधर तिलक (अथवा लोकमान्य तिलक, मूल नाम केशव गंगाधर तिलक, 23 जुलाई 1856 – 1 अगस्त 1920), एक भारतीय राष्ट्रवादी, शिक्षक, समाज सुधारक, वकील और एक स्वतन्त्रता सेनानी थे। भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के आरम्भिक काल में उन्होंने भारतीय स्वतन्त्रता के लिये नये विचार रखे और अनेक प्रयत्न किये। अंग्रेज उन्हें “भारतीय अशान्ति के […]

Read More