साहित्य
शिव स्तुति
शिव की महिमा का है चमत्कार। उन्होंने बनाया बहुत बड़ा संसार। ये हैं अग्रगण्य त्रिपुरारी। ये तांडव नृत्य करते हैं भयहारी। इनकी डमरू बोलती डम_डम_डम। इनके भक्त नाचते छम_छम_छम। भोला खाते भांग _धतूरा। ये कल्याण करते पूरा_पूरा। इनको भाते हैं अकोन, कनेर, धतूरा के फूल। जो उनकी पूजा के लिए है मूल। औढरदानी का […]
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तुलसीदास : रामकथा के जनसुलभ प्रस्तोता
* डॉ. सम्राट् सुधा किंवदंतियों के अनुसार, बारह महीने तक माता के गर्भ में रहने वाले तुलसी ने जन्म लेते ही राम-नाम का उच्चारण किया था। रामकथा को बनाया जनसुलभ ————– प्रभु श्रीराम की कथा को जन-सुलभ बनाने के लिए तुलसीदास ने रामचरितमानस की रचना की। इसके माध्यम से उन्होंने संपूर्ण […]
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रोही की रोजड़ी : राजस्थान की माटी से एक प्रेरक संस्मरण संग्रह
पुस्तक समीक्षा मनुष्य के सूक्ष्म मनोविज्ञान ,राजस्थान की सुगंध और किसी भी व्यक्ति की विविध परिस्थितियों को लिए हिन्दी संस्मरण विधा का एक मर्मस्पर्शी संग्रह ‘रोही की रोजड़ी’ जून,2025 में प्रकाशित हुआ है। लेखिका हैं संतोषी। एक कौतूहल हैं ‘रोही’ और ‘रोजड़ी’ ! ये हिन्दी विशेष के पाठकों के लिए अपरिचित शब्द हैं। समीक्षक […]
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पंडित गौरीदत्त (1836 – 8 फ़रवरी 1906)
पंडित गौरीदत्त का जन्म पंजाब प्रदेश के लुधियाना नामक नगर में सन् 1836 में हुआ था। आपके पिता पंडित नाथू मिश्र प्रसिद्ध तांत्रिक और सारस्वत ब्राह्मण थे। आपकी प्रारम्भिक शिक्षा साधारण ही हुई थी। केवल पंडिताई का कार्य करने तक ही वह सीमित थी। जब आपकी आयु केवल 5 वर्ष की ही थी तब आपके […]
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देवरानी जेठानी की कहानी : पंडित गौरीदत्त (हिंदी उपन्यास)
(हिन्दी का पहला उपन्यास ‘देवरानी जेठानी की कहानी’ (1870) है अथवा ‘परीक्षागुरु’ (1882), इस पर विद्वानों में मतभेद है। जहॉं डॉ नगेन्द्र और डॉ निर्मला जैन सरीखे विद्वानों ने लाला श्रीनिवासदास के परीक्षागुरु को हिन्दी का पहला मौलिक उपन्यास माना है, वहीं डॉ गोपाल राय व डॉ पुष्पपाल सिंह आदि ने पं गौरीदत्त रचित देवरानी […]
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प्रकाशवीर शास्त्री
प्रकाशवीर शास्त्री (30 दिसम्बर 1923 – 23 नवम्बर 1977) भारतीय संसद के सदस्य तथा आर्यसमाज के नेता थे। उनका मूल नाम ‘ओमप्रकाश त्यागी’ था। वे एक प्रखर वक्ता थे। उनके भाषणों में तर्क बहुत शक्तिशाली होते थे। उनका भाषण सुनने के लिये लोग दूर-दूर से पैदल चलकर आ जाते थे। उनके विरोधी भी उनके प्रशंसक […]
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गुरु -शिष्य
गुरु होते हैं मार्गदर्शक शिष्यों के लिए आकर्षक। गुरु देते शिष्यों को शिक्षा शिष्य भी करते गुरु की रक्षा। गुरु _शिष्य के रिश्ते हैं अनमोल इनके होते हैं सुन्दर बोल। दोनों होते हैं महत्वपूर्ण ये दोनों होते हैं पूर्ण। गुरु_शिष्य करते भारत का कल्याण जिससे भारतवर्ष बना रहेगा महान। गुरु का होता यशोगान शिष्य […]
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महेंद्र अश्क को शायरी का शौक़ जूनून की हद तक था
अल्लाह मेरी फ़िक्र को इतनी रसाई दे/ मैं देखने लगू तो मदीना दिखाई दे। यह शेर किसी मुस्लिम शायर का नहीं बल्कि आलमी शौहरत याफ्ता शायर महेन्द्र सिंह अश्क का है।अश्क साहब ने शायरी खास तौर से नात गोई में बहुत नाम कमाया। एक ज़माना था,जब बड़े मुशायरो की फहरिस्त में बेकल उत्साही,जिगर मुरादाबादी,खुमार बारा […]
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चन्द्रशेखर आज़ाद
चन्द्रशेखर ‘आजाद (23 जुलाई 1906 — 27 फ़रवरी 1931) भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के स्वतंत्रता सेनानी थे। वे शहीद राम प्रसाद बिस्मिल व शहीद भगत सिंह सरीखे क्रान्तिकारियों के अनन्यतम साथियों में से थे। सन् 1922 में गाँधीजी द्वारा असहयोग आन्दोलन को अचानक बन्द कर देने के कारण उनकी विचारधारा में बदलाव आया और वे […]
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बाल गंगाधर तिलक
बाल गंगाधर तिलक (अथवा लोकमान्य तिलक, मूल नाम केशव गंगाधर तिलक, 23 जुलाई 1856 – 1 अगस्त 1920), एक भारतीय राष्ट्रवादी, शिक्षक, समाज सुधारक, वकील और एक स्वतन्त्रता सेनानी थे। भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के आरम्भिक काल में उन्होंने भारतीय स्वतन्त्रता के लिये नये विचार रखे और अनेक प्रयत्न किये। अंग्रेज उन्हें “भारतीय अशान्ति के […]
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