विश्व हिंदी दिवस : हिंदी ज्ञान-विज्ञान-कम्प्युटर की भाषा

 

दिनांक-11.1.2023

खाजा बंदानवाज़ विश्वविद्यालय, कलबुर्गी के हिंदी विभाग द्वारा “आधुनिक संदर्भ में हिंदी के विविध आयाम” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया । इस संगोष्ठी का आयोजन हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. देशमुख अफशाँ बेगम तथा सहायक प्रोफेसर डॉ. मिलन बिश्नोई द्वारा किया गया । इस कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि सुप्रसिद्ध साहित्यकार,संपादक व मौलाना आजाद विश्वविद्यालय, हैदराबाद के हिंदी परामर्शी आचार्य ऋषभदेव शर्मा जी एवं मुख्य अतिथि तमिलनाडु केंद्रीय विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के आचार्य प्रो. एस.वी.एस.एस नारायण राजू जी थे ।

बतौर विशिष्ट अतिथि आचार्य ऋषभदेव शर्मा ने आधुनिक हिंदी की दस दिशाएँ बतायी जो इस प्रकार है-1. कूटनीति और विंदेश संबंध की भाषा 2. शासन(गवर्नेंस) और न्याय की भाषा 3. शिक्षा, प्रतियोगिता और रोजगार की भाषा 4. आंदोलन, चुनाव और राजनीति की भाषा 5. मीडिया,नव मीडिया और सिनेमा की भाषा 6. विज्ञापन: बाजार-दोस्त भाषा 7. ज्ञान-विज्ञान-विमर्श: कंप्यूटर-दोस्त भाषा 8. अनुवाद उद्योग की भाषा 9.आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था : राष्ट्रीय अस्मिता की भाषा 10. संपर्क/राज/राष्ट्र/ विश्वभाषा : शक्ति की भाषा अर्थात् इन दस दिशाओं के माध्यम से उन्होंने बताया हिंदी को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आमजन के मन-मस्तिष्क में प्रतिष्ठित करने की आवश्यकता है । संवैधानिक दृष्टि से हिंदी को राजभाषा का दर्जा दिया गया है किंतु हिंदी देश की राष्ट्रभाषा के रूप में लोगों के मन-मस्तिष्क रची-बसी है । नई शिक्षा नीति के तहत् भारतीय भाषा और हिंदी में सुधार अवश्य दिखाई देंगे । अब हिंदी विश्व में जंगल की आग की तरह फैल रही है । जैसे- बाजारवाद,गीत-संगीत,संस्कृति,पर्यटन तथा साहित्यिक गतिविधियों व जनसंचार इत्यादि के माध्यम से । अंत यानि हिंदी अपने अस्तित्व की भाषा होने के साथ अभिव्यक्ति को जोड़ने वाली भाषा है ।

इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि प्रो. एस.वी.एस.एस. नारायण राजू ने त्रिपल (त्रि-आर) के माध्यम से हिंदी को स्थापित करने का नुस्खा बताया । और कहा कि हिंदी को केवल साहित्यिक दृष्टिकोण से ही नहीं बल्कि आधुनिक समय में रोजगार के दृष्टिकोण से समृद्ध बनाने का अधिक से अधिक प्रयास करने की आवश्यकता है । विज्ञान, कम्प्युटर तथा वाणिज्य से जुड़े विद्यार्थियों को रोजगारोन्मुखी हिंदी तथा जनसंचार की हिंदी के बारे में विस्तार से बताया । वर्तमान समय में हिंदी को लग्न से समझने का प्रयास तथा सोशल मीडिया का सदुपयोग करने से विद्यार्थी हिंदी में जीविकोपार्जन कर सकते हैं । वे पत्रकारिता,विज्ञापन,स्पीकर, युट्यूब तथा ब्लॉग लेखन, अनुवाद, शिक्षण इत्यादि के क्षेत्र में अपनी पहचान स्थापित हिंदी के माध्यम से कर सकता है ।

इस कार्यक्रम के शुभारंभ में ख़िरत (ईश्वर की वंदना ) उर्दू विभाग के सहायक प्रोफेसर अतिउल्लाह ने की।  संचालन  हिंदी विभाग की सहायक आचार्य डॉ. मिलन बिश्नोई ने किया और अतिथि वक्ताओं का स्वागत व धन्यवाद ज्ञापन विभागाध्यक्ष डॉ. देशमुख अफशाँ बेगम ने किया । इस कार्यक्रम का समापन खाज़ा बंदानवाज विश्वविद्यालय,कलबुर्गी की संकाय अध्यक्ष डॉ. निशात आरिफ हुसैनी समन्वयक श्रीमती खुदसिया परवीन की उपस्थिति में हुआ ।

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