Author: editor
एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य
– ऋषभदेव शर्मा जी-20 नेताओं का 18वाँ शिखर सम्मेलन 9 और 10 सितंबर, 2023 को नई दिल्ली में आयोजित हो रहा है। इस मौके पर दुनिया की 20 सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के ये नेतागण अर्थव्यवस्था, जलवायु परिवर्तन और सतत विकास जैसे वै0श्विक मुद्दों पर चर्चा करने के लिए एक साथ बैठेंगे। शिखर सम्मेलन का […]
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गुरु हमारे जीवन दाता
माँ देती जन्म हमें, पिता देता साया हमें लेकिन गुरु देता सबसे अनमोल ज्ञान सिखाता मानवता का पाठ हमें। मानो गुरु एक है शिल्पकार, देते कच्ची मिट्टी को आकार- प्रकार, हैं भाग्य विधाता हमारा वे, ज्ञान का अविरल स्रोत जहाँ। सत्य – न्याय के पथ पर चलना जीवन के हर संघर्षों से, सिखाते हैं […]
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गुरु
शिक्षा ही अनमोल धरोहर है हमारी। बिन गुरु शिक्षा असंभव है हमारी॥ गुरु ही सखा, गुरू ही माता-पिता का रूप है। गुरु ही शिष्य की आत्मीयता का स्वरूप हैं।। अंधेरी राहो में भी जो प्रकाश की राह दिखाता है। गुरु ही सफलता की रुकावटों से लड़ना सिखाता है।। बिन गुरु अर्जुन जैसा धर्नुधारी बनना […]
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स्वतंत्रता संग्राम 1857 में जनपद बागपत के तीन क्रांतिवीर
मोहित त्यागी शोधार्थी सचलभाष- 9917231947 सारांश भारतवर्ष के इतिहास में भी इसी प्रकार की एक महान घटना का आरंभ 10 मई 1857 को मेरठ की पावन भूमि पर हुआ है। जिसे भारतीय इतिहास में अंग्रेजों के विरूद्ध भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम माना गया है। उस दौर में जब संचार के सीमित साधन थे। न […]
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ग़ज़ल/आदित्य आजमी
ग़ज़ल सिसक रही सदी लिखो कवि, सूख रही है नदी लिखो कवि! नेकी का तो पतन हो रहा है, बढ़ रही है बदी लिखो कवि! किसी दिन घर को गिरा देगी, ये बुनियादी नमी लिखो कवि! मंगल पर जाने की तैयारी है, कम पड़ती जमीं लिखो कवि! आधुनिकता के इस काल मे, गुम हो गई […]
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देश और मीडिया एक विवेचन बदले हालात की पत्रकारिता
डाॅ. श्रीगोपाल नारसन बदले हालात में और इतिहास बनती हिंदी पत्रकारिता को बचाने के लिए विचार करना होगा कि सुबह का अखबार कैसा हो? समाचार चैनलों पर क्या परोसा जाए? क्या नकारात्मक समाचारों से परहेज कर सकारात्मक समाचारों की पत्रकारिता संभव है? क्या धार्मिक समाचारों को समाचार पत्रों में स्थान देकर पाठको को धर्मावलम्बी […]
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मानवीय संवेदनाओं का चित्रण कहानी-संग्रह ’वो मिले फेसबुक पर’
सुरेन्द्र अग्निहोत्री जब जुपिन्द्रजीत सिंह का कहानी-संग्रह ’वो मिले फेसबुक पर’ मेरे हाथों में आया तो बस पढ़ता ही चला गया। उनकी कहानियाँ मन-मस्तिश्क को झिंझोड़ती ही नहीं, बल्कि मस्तिश्क में अपने लिए एक कोना स्वयं ही तलाष कर जगह बना लेती हैं। साथ ही पाठक को सोचने पर विवष कर देती हैं और एक […]
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हिमालय का दर्द: तुम अपनी मुहब्बत वापस लो!
ऋषभदेव शर्मा जी हाँ, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में महावृष्टि और भूस्खलन के प्रलयंकर दृश्य देखकर तो यही लगता है कि कालिदास के देवतात्मा नगाधिराज हिमालय की आत्मा यही चीत्कार कर रही होगी – ‘अब नजअ का आलम है मुझ पर/!तुम अपनी मुहब्बत वापस लोय/ जब कश्ती डूबने लगती है/ तो बोझ उतारा करते हैं!’ […]
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भईया जी और सोशल मीडिया
अनिल शर्मा ‘अनिल’ भईया जी को अहम और वहम दोनों का ही मीनिया है। अहम इस बात का कि सोशल मीडिया किंग कहने लगे है लोग और वहम इस बात का कि इनसे अच्छा और बड़ा साहित्यकार कोई नहीं है। अपनी मस्ती में, पूरी बस्ती में भईया जी लंबा कुर्ता और चैड़ा पायजामा पहने […]
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सोशल मीडिया का बदलता चरित्र
डॉ. गुर्रमकोंडा नीरजा इधर कुछ समय से कई अत्यंत संवेदनशील विषयों के संदर्भ में अपनी विवादास्पद भूमिका के कारण मीडिया (मुद्रित और इलेक्ट्रॉनिक पत्रकारिता) प्रश्नों के घेरे में है। इस मुद्दे पर बहस छिड़ी हुई है कि मीडिया को अधिक संवेदनशील, अधिक प्रामाणिक, अधिक विश्वसनीय और अधिक मानवीय बनना चाहिए। जबकि वह दिनोंदिन […]
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