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नवजागरण कालीन साहित्यकारों की हिंदी पत्रकारिता सन् 1826 से 1899 ई.
अमन कुमार तत्कालीन परिस्थितियाँ इस समय देश के हालात बहुत अच्छे नहीं थे। भारत की सत्ता मुगलों के हाथों से लगभग निकल चुकी थी। पुर्तगालियों का असर भी कम हुआ था और अंग्रेज संपूर्ण भारत को अपने अधीन कर चुके थे। ‘‘उन्नीसवीं शताब्दी के दूसरे दशक के भारतीय जनजीवन में ब्रिटिश साम्राज्य की दहशत […]
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हिंदी पत्रकारिता का उद्भव और विकास
अमन कुमार पत्रकारिता का मूल उद्देश्य सूचना देना है। सूचना देने का काम मानव तब से करता आ रहा है, जब वह विकास की शैशवावस्था में था, क्योंकि ‘‘आत्माभिव्यक्ति मनुष्य की स्वाभाविक प्रवृत्ति है। मानव जब तक अपने बंधु-बान्धवों, स्वजन-परिजनों, इष्ट-मित्रों आदि के सम्मुख अपने भावों और विचारों को अभिव्यक्त नहीं करता, तब तक उसे […]
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साहित्य और पत्रकारिता का अंतः सम्बंध
अमन कुमार साहित्य और पत्रकारिता को कितना भी अलग करने की चेष्टा की जाये परंतु साहित्य और पत्रकारिता को अलग नहीं किया जा सकता। जिस प्रकार साहित्य की विभिन्न विधाएँ अभिव्यक्ति का माध्यम बनती हैं, उसी प्रकार पत्रकारिता भी समाज और समाज में घटने वाली घटनाओं को जानने का माध्यम होती है। साहित्य सृजन की […]
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हिंदी भाषा के विकास में पत्र-पत्रिकाओं का योगदान
– ऋषभदेव शर्मा हिंदी पत्रकारिता का प्रश्न राष्ट्रभाषा और खड़ी बोली के विकास से भी संबंधित रहा है। हिंदी भाषा विकास की पूरी प्रक्रिया हिंदी पत्रकारिता के भाषा विश्लेषण के माध्यम से समझी जा सकती है। इस विकास में भाषा के प्रति जागरूक पत्रकारों का अपना अपना योगदान हिंदी को मिलता रहा है। ये पत्रकार […]
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कोख़ में हत्या
अमन कुमार त्यागी सुधा को मुहल्ले भर के सभी बच्चे, जवान और बूढ़े जानते थे। सभी सुधा से बेहद लगाव रखते। सुधा भी तो सभी के दुःख दर्द में शरीक़ होती। वह कहती -दुःख बाँटना आत्मसंतुष्टि का परिचायक है।’ सौम्य, सुंदर, सुशील सुधा ने भले ही मायके में अमीरी के दिन देखे हों मगर ससुराल […]
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नंदलाल बोस की कूची से संविधान की सजावट
कुमार कृष्णन आत्मा के उजास में सच को देखने और अभ्युदय का नया अध्याय रचने वाले मोहनदास करमचन्द्र गांधी का जीवन भारतीय जीवन मूल्यों में रची-बसी भरी-पूरी संस्कृति का आदर्श रहा है।स्वाधीनता के इस नायाब शिल्पी की शख़्सियत संवेदना के उन सूत्रों में गुंथी है, जहाँ मन के अथाह में शब्द, स्वर, रंग, लय […]
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बापू के आह्वान पर आजादी की लड़ाई में कूदे शुभकरण चूड़ीवाला
कुमार कृष्णन बीते सदी के दूसरे दशक की शुरूआत में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी स्वतंत्रता आंदोलन के केंद्र में आ गये थे और इससे उन्होंने आम लोगों से जोड़ा। यह वह दौर था, जब 21 मार्च 1919 को रोलेट एक्ट लागू किया गया, इसमें न अपील न दलील और न वकील की व्यवस्था थी। महात्मा […]
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साहित्यकार ऋषभ के व्यक्तित्व और कृतित्व का समग्र आकलन
डॉ. सुषमा देवी नजीबाबाद (उत्तर प्रदेश) से प्रकाशित त्रैमासिक शोध पत्रिका ‘शोधादर्श’ द्वारा हिंदी भाषा-साहित्य के चर्चित हस्ताक्षर प्रोफेसर ऋषभदेव शर्मा के रचना संसार पर आधारित विशेषांक ‘प्रेम बना रहे’ को पाँच खंडों में विभाजित करते हुए प्रकाशित किया गया है। प्रथम खंड ‘आखिन की देखी’ में प्रो. ऋषभदेव शर्मा के सान्निध्य में […]
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‘शोधादर्श’ का विशेषांक : प्रेम बना रहे
✍️समीक्षक : डॉ. चंदन कुमारी गन्ने के गाँव खतौली से मोतियों के शहर हैदराबाद तक की संघर्ष और कामयाबी भरी अपनी यात्रा के विविध पड़ावों में जन-जन से संपर्क सूत्र साधते; सहज गति से अविराम मनःस्थिति के साथ निरंतर साहित्य सृजन में लीन और संगोष्ठियों में सदैव तत्पर रहनेवाले प्रो. ऋषभदेव शर्मा (1957) […]
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कुछ लम्स कुछ गिरहें अमलतास
पुस्तक का नाम – कुछ लम्स कुछ गिरहें अमलतास विधा – (काव्य संग्रह) कवि – अर्चना राज चैबे प्रकाशक – ओपन डोर, नजीबाबाद आईएसबीएन – 978-81-958838-0-6 प्रथम संस्करण – 2022 पुस्तक मंगाने का पता – साईं एंक्लेव, निकट धनौरा देवता, आयल डिपो रोड, नजीबाबाद-246763 मोबा.- 9897742814 इमेल- opendoornbd@gmail.com मूल्य – 200 रुपए (डाक […]
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