जगत की धरोहर : मां
मां प्यार का संगम है ।
इनसे सारे कार्य सफल हैं ।
ये बच्चों को चलना
और बोलना सिखाती।
ये बच्चों को पढ़ना
और खेलना सिखाती।
आप बच्चों को बनाती
नेक इंसान ।
ये शिक्षित होकर करते
राष्ट्र का कल्याण।
मां प्यार का संगम है।
इनसे सारे कार्य सफल हैं।
आप जगत की हैं धरोहर
दुखों को लेती हैं हर।
इसलिए सारे जहां में
आपकी हो रही जय जय।
आप गर्भ में शिशु को पालन कर समाज को दिया सहारा।
आप पूजनीया व आदरणीया हैं सारे जगत में न्यारा।
मां प्यार का संगम है ।
इनसे सारे कार्य सुगम हैं।
अमूल्य धरोहर : मां
मां मेरी अलौकिक निधि,
जग जननी है मेरी।
भाग्य फैसला करने वाली,
अमूल्य धरोहर है मेरी।
संस्कृति को बढ़ाने वाली,
संसार को बसाने वाली।
पुत्र हेतु चिंता करने वाली,
दुखों को हरने वाली।
मेरी अमूल्य माता है।
मेरी भाग्य विधाता है।
ममता की करुणा निधि,
प्यास की तृप्ति करने वाली।
प्यार की संचित विधि,
गलती को माफ़ करने वाली।
मेरी अमूल्य माता है।
मेरी भाग्य विधाता है।
दुर्गेश मोहन
बिहटा,पटना(बिहार)
