‘प्रेरणा गोष्ठी’ का आयोजन, नवोदित रचनाकारों को मिला वरिष्ठ कवियों का आशीर्वाद।
हरिद्वार . दीपशिखा साहित्यिक एवं सांस्कृतिक मंच, हरिद्वार की काव्य गोष्ठी राजलोक विहार में सम्पन्न हुई। गोष्ठी की अध्यक्षता डाॅ0 मीरा भारद्वाज ने की।संचालन डाॅ0 सुशील कुमार त्यागी अमित ने और सरस्वती वंदना वृंदा शर्मा ने की। इस अवसर पर स्वामी दर्शनानंद गुरुकुल से पधारे आचार्य मुकुंद देव ने त्वरित अनुष्टुप छंद में संस्कृत श्लोक रचकर दीपशिखा को शुभकामनाएं दी और कहा कि दीपशिखा निरंतर प्रगति की ओर उन्मुख रहे। नवोदित रचनाकारों की रचनाएं प्रशंसनीय थी ।सोनाक्षी ने कहा- सांसों में ही नहीं इरादों में तूफान बनाए रखना। ओजस्वी सनी ने कहा मैं भारत का युवा हूँ शब्दों की लौ जगाता हूं।कवयित्री आरती की रचना पिता को समर्पित रही- शब्दों से नहीं कर्म से है महान, यही है पिता की पहचान। आचार्य सुभाष जोशी की सुंदर रचना रही- प्रभात की बेला मनोहर सब का मन हर्षित कर जाती है। वृंदा शर्मा के मधुर गीतों ने सभी को आनंद- विभोर किया।हिन्दी-संस्कृत के विद्वान डॉ0 विजय कुमार त्यागी ने संस्कृत गीत सुनाकर वाह-वाही लूटी और शुभेच्छा दी – सदा सदा फूले-फले यह कविता परिवार । हिन्दी सेवक डाॅ0 अशोक गिरि और वरिष्ठ कवि ब्रिजेन्द्रहर्ष ने नवोदित रचनाकारों का मार्गदर्शन किया। चेतनापथ संपादक अरुण कुमार पाठक ने गीत के माध्यम से कहा – आँधियों में दीप जलाए रखना ।डाॅ0 सुशील कुमार त्यागी ने सुनाया – रह रह रोता आज मुसाफिर गम को सहता है ।बीहड पंथ अपार…।डाॅ0मीरा भारद्वाज ने युवाओं सम्बोधित करते हुए कहा- युग के तुम प्रहरी बन जाओ, सुन लो जग की करुण पुकार। धैर्य धरा का बना चुनौती विचित्र हुआ अपना संसार। इसी के साथ सब के प्रति आभार व्यक्त किया।
