साहित्य
सुप्रसिद्ध दार्शनिक एवं संन्यासी : स्वामी विवेकानंद
भारतीय इतिहास में सुप्रसिद्ध दार्शनिक, संन्यासी ,विद्वान ,विचारक एवं साहित्यकार के रूप में मिली महत्वपूर्ण योगदान के लिए स्वामी विवेकानंद जाने जाते हैं। इनका मूल नाम नरेंद्र नाथ दत्त था। आपका जन्मदिन भारतीय इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित है ।आपका जन्म 12 जनवरी, 1863 को कोलकाता में हुआ था।भारतीय आपके जन्मदिन को राष्ट्रीय युवा […]
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देवव्रत – कालजयी योद्धा की वीरगाथा
पुस्तक समीक्षा देवव्रत – कालजयी योद्धा की वीरगाथा लेखक – प्रभात सिन्हा समीक्षक_दुर्गेश मोहन प्रकाशक – फ्लाईड्रीम्स पब्लिकेशंस अंतः करण में उतर जाती हैं _देवव्रत_कालजयी योद्धा की वीरगाथा कुछ कृतियाँ केवल पढ़ी नहीं जातीं, वे अंतःकरण में उतर जाती हैं। देवव्रत – कालजयी योद्धा की वीरगाथा ऐसी ही एक अनुपम रचना है, जो महाभारत के […]
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डॉक्टर श्रीरंजन सूरिदेव
सरस्वती सारस्वत वरद पुत्र को, मेरा शत _शत नमन । आपने साहित्य से अगाध प्यार कर , किया साहित्य सृजन । साहित्य सृजित कर, किया नाम रोशन । साहित्य जगत में , आपकी प्रतिभा थी, विलक्षण । आपका नाम गूंजता कण_कण, आपथे सफल, विद्वतजन । आपके प्रशंसक थे , सकल पाठकगण। श्रीरंजन थे , […]
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साहित्य के आधार स्तम्भ डॉ0 श्रीरंजन सूरिदेव
भारतीय साहित्य गगन के आभामंडित, सुविख्यात एवं ज्ञान की किरणों को बिखेरती हुई पाठकों के अंतर्वृंद को झकझोरती हुई उसे आनंदित कर चार चांद लगा देने में सक्षम एवं सफल थे-हमारे प्यारे साहित्यकार डॉ0 श्रीरंजन सूरिदेव। डॉ. श्रीरंजन सूरिदेव का जन्म28 अक्टूबर ,1926 ईस्वी को शुंभेश्वर नाथ धौनी, दुमका में हुआ था। इनकी शिक्षा […]
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भागलपुर ने दी राष्ट्रकवि दिनकर को ख्याति
कुमार कृष्णन भागलपुर से ही राष्टकवि रामधारी सिंह दिनकर को ख्याति मिली। इसे उन्होंने स्वयं स्वीकार किया है। उनके मुताबिक- ” 1933 में सुप्रसिद्ध इतिहासकार काशी प्रसाद जायसवाल नें भागलपुर में बिहार प्रादेशिक हिन्दी साहित्य सम्मेलन का सभापतित्व किया था।इसके आयोजक थे पं शिवदुलारे मिश्र अपनी कविता ‘हिमालय’ ‘के प्रति’ उपकार मानता हूं। जनता में […]
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रामधारी सिंह दिनकर
विधा – छन्दमुक्त “””””””””””””””””””” राज्य बिहार जिला मुंगेर, ग्राम सिमरिया में जन्मे । 30 सितम्बर 1908 को, रविसिंह-मनरूप देवी के घर में ।। रामधारी सिंह दिनकर, राष्ट्रकवि दिनकर सदृश थे । गद्य-पद्य में सिद्ध महारथ, पढ़ने को सब लोग विवश थे ।। था ‘विजय सन्देश’ पहला, काव्य संग्रह आपका । आलोचना ‘मिट्टी की ओर’,’शुद्ध कविता […]
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यशवंत सिंह, जिस वैचारिक सत्ता की विरासत हैं, उसने भारतीय राजनीति में बेखौफ़ इंदिरा की तानाशाही का विरोध किया था
#जन्मदिन_पर_विशेष। @अरविंद सिंह जिस कालखंड में हमारी पीढ़ी की सियासी समझ और राजनीतिक चेतना का विस्तार हो रहा था, और नेताओं के दृश्य और अदृश्य चुंबकीय व्यक्तित्व एवं आभा मंडल के ज़द में जाने का दौर,एक परंपरा का रूप लेता जा रहा था। जिस व़क्त जेपी की ख़ुमारी और नशे के भावनात्मक वाष्प में पिघलती […]
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भाषाई संस्कारों के कोश थे साहित्यकार त्रिलोचन
■ डॉ. सम्राट् सुधा मेरा यह सौभाग्य रहा कि प्रगतिवादी काव्य के स्तंभ-कवि त्रिलोचन से मैं जीवन में तीन बार मिल सका। इनमें 28 अक्टूबर, 2001 की भेंट तो नितान्त औपचारिक ही थी, जब रुड़की की एक संस्था के निवेदन पर मैं उन्हें लेने ज्वालापुर ( हरिद्वार ) गया था। फिर ,जून 2005 से […]
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स्वतंत्रता आंदोलन में साहित्य की भूमिका
हमारा देश भारत अंग्रेजों के अधीन लगभग 300 वर्षों तक रहा ।अंग्रेजों से आक्रांत होकर भारतीय वीर महापुरुषों ने भारत माता की स्वाधीनता के लिए सर्वस्व न्योछावर कर दिया। जिसका जीता जागता उदाहरण 15 अगस्त, 1947 को भारत की स्वतंत्रता तथा 26 जनवरी, 1950 को गणतंत्र राष्ट्र घोषित किया गया ,जो हमारे लिए गर्व […]
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शांति शिरोमणि तुलसीदास
भारतीय साहित्य गगन के चन्द्र काव्य जगत के आप हैं हास। वंदनीय हे शांति शिरोमणि नमो भक्त कवि तुलसीदास । बांदा जिला ग्राम राजापुर आपसे हुआ समुन्नत भाल। मां हुलसी के पुत्र महाकवि आत्माराम पिता के लाल। भारत के अभिमान जगत के आप हैं कवि उज्ज्वल आदर्श। नत मस्तक हो विश्व कह रहा धन्य […]
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