अर्चना राज के 100 फायकू

 

1
ज़िंदगी की शाम है
स्याह रातें भी
तुम्हारे लिये।
2
कोई पनघट का किनारा
अब तलक प्यासा
तुम्हारे लिये।
3
बाजरे की शक्ल में
कैद हैं मोती
तुम्हारे लिये।
4
जिस्म से बेज़ार हूं
इश्क हूं जीती
तुम्हारे लिये।
5
मुस्कुराहटें बेहिसाब हैं यहां
हौसले भी बहुत
तुम्हारे लिये।
6
आईना कमज़र्फ़ है अब
इश्क हैं नजरें
तुम्हारे लिये।
7
है रज़ामंदी तेरी तो
मैं बनू क़ातिल
तुम्हारे लिये।
8
माज़ूर है दिल मेरा
और सांसें भरी
तुम्हारे लिये।
9
जलता अलाव हूं मैं
सुलगती है रूह
तुम्हारे लिये।
10
बुत हो जाने को
बेचैन हूं मैं
तुम्हारे लिये।
11
पत्थरों के ढेर पर
बिखरी हैं नज़्में
तुम्हारे लिये।
12
ढूंढ लाती हैं सदा
यादें अब भी
तुम्हारे लिये।
13
गुलदाउदी महक उठती है
अब भी बेसबब
तुम्हारे लिये।
14
खुशबुओं की क़ैद है
मदहोशी है अंजाम
तुम्हारे लिये।
15
लंबी सड़क सा जनाज़ा
गुज़रता रहा मेरा
तुम्हारे लिये।
16
कहो तो कह दूं
कोई नहीं मैं
तुम्हारे लिये।
17
सुनहरे शब्द कांपे है
हमारे नाम पर
तुम्हारे लिये।
18
तमन्ना पास आने की
गुज़रने की तुम्हींसे
तुम्हारे लिये।
19
उठाकर धूप का आंचल
ढका ख़्वाबों को
तुम्हारे लिये।
20
गयी अब रात मतवाली
सुबह जागी है
तुम्हारे लिये।
21
जी लेने को विवश
हो जाती हूं
तुम्हारे लिये।
22
गुज़र जाऊं कभी हदसे
वो जुनून हूं
तुम्हारे लिये।
23
स्याह रातों से लिखी
कविता हूं मैं
तुम्हारे लिये।
24
हर तरफ़ था मौन
इबादत होती रही
तुम्हारे लिये।
25
हर ज़र्रा है ख़ास
इबादत की ख़ातिर
तुम्हारे लिये।
26
सांस जीती है यहां
संग बेचैनियों के
तुम्हारे लिये।
27
बड़ा आसान सफ़र है
होना है गुमशुदा
तुम्हारे लिये।
28
शब्द-शब्द पिघलते रहे
होने को नज़्म
तुम्हारे लिये।
29
खुशियों ने छेड़ी तान
सुबह गुनगुना रही
तुम्हारे लिये।
30
सफ़र हुआ है शुरू
दूर मंज़िल नहीं
तुम्हारे लिये।
31
बहुत पाक है रिश्ता
मां बच्चे का
तुम्हारे लिये।
32
न रौंदों तुम इसे
मासूम है बचपन
तुम्हारे लिये।
33
सम्मान आंखों में है
हैसियत में नहीं
तुम्हारे लिये।
34
दर्द होता है बहुत
हिमालय को भी
तुम्हारे लिये।
35
शिक्षा इक वरदान है
अक्षर सारा ज्ञान
तुम्हारे लिये।
36
रात कितनी हो स्याह
सुबह ज़रूर होगी
तुम्हारे लिये।
37
रोज़ नया संघर्ष है
मुश्किल पूरे वर्ष
तुम्हारे लिये।
38
आसमां रोया बहुत है
धूप सा होकर
तुम्हारे लिये।
39
सबसे बड़ी इबादत है
करना बस कर्तव्य
तुम्हारे लिये।
40
संसद का ये सत्र है
नहीं कोई मैदान
तुम्हारे लिये।
41
बारिश इक नज़्म है
ठंडक इक शेर
तुम्हारे लिये।
42
घुंघरू बंधन से थे
पायल मुस्कान है
तुम्हारे लिये।
43
पीतल की थाप पर
मस्तियां बिखर उठीं
तुम्हारे लिये।
44
दर्द अभी ज़िंदा है
अश्क बेशक मौन
तुम्हारे लिये।
45
मैं यहां बाज़ार हूं
बेचती हूं सब
तुम्हारे लिये।
46
कसमसाती साड़ियों में चीख़ती
मजबूरीयों का सिलसिला
तुम्हारे लिये।
47
आईना हर रोज़ ही
तकता रहा मुझको
तुम्हारे लिये।
48
दूर तक दहलीज़ है
और पत्थर पांव
तुम्हारे लिये।
49
इक अदा ख़्वाहिश की
इक दुआ की
तुम्हारे लिये।
50
दिल मेरा सहमा हुआ
भीगते पन्नों सा
तुम्हारे लिये।
51
सर्द आहों से सिहरकर
गूंजती है रात
तुम्हारे लिये।
52
मौन बड़ा बेज़ार है
तैरते कुछ शब्द
तुम्हारे लिये।
53
संदली सांसों कि ख़ुशबू
ज़ज़्ब है मुझमें
तुम्हारे लिये।
54
रात आधी चांद रूठा
इक ग़ज़ल जीकर
तुम्हारे लिये।
55
करके मौसम का बहाना
रुक गयी हूं
तुम्हारे लिये।
56
अब करो कुछ शर्म
हैं इंसान सब
तुम्हारे लिये।
57
ज़लज़ला उठने लगा है
सोच में सबके
तुम्हारे लिये।
58
रात भर बच्चे बिलखते
श्राप देता मन
तुम्हारे लिये।
59
कर्ज़ का है बोझ
भारी ज़िंदगी पर
तुम्हारे लिये।
60
एक बुत मंदिर में
इक बैठा सड़क
तुम्हारे लिये।
61
ये मेरी तक़दीर है
कि मैं नहीं
तुम्हारे लिये।
62
चाह लो जो तुम
मैं बनूं दुल्हन
तुम्हारे लिये।
63
द्रौपदी कलयुग में भी
बस द्रौपदी है
तुम्हारे लिये।
64
राह का पत्थर हूं
नहीं साहिल कोई
तुम्हारे लिये।
65
मां नहीं होती मेरी
अभिशाप सा सच
तुम्हारे लिये।
66
ज़िंदगी न कर शिक़ायत
हूं अभी ज़िंदा
तुम्हारे लिये।
67
मत करो तुम भ्रूणहत्या
जन्मना है मुझे
तुम्हारे लिये।
68
बेटियां भी हैं अमानत
उस ख़ुदा की
तुम्हारे लिये।
69
गुनगुनी सी धूप है
और हैं मदहोशियां
तुम्हारे लिये।
70
दिल मेरा सज़दा करे
हर रात-दिन
तुम्हारे लिये।
71
आईने में अक़्स है
या ख़्वाब टूटे
तुम्हारे लिये।
72
डूबकर चाहा तुम्हें या
चाहकर डूबी यहां
तुम्हारे लिये।
73
इन दरो-दीवार में
गूंजते हैं नग़मे
तुम्हारे लिये।
74
भूख ने तोड़ा तुम्हें
रोने लगी इंसानियत
तुम्हारे लिये।
75
पीड़ा भी उमड़ी है
अश्क लगे बहने
तुम्हारे लिये।
76
उम्र भर तन्हाइयों का
सिलसिला चलता रहा
तुम्हारे लिये।
77
रात भर इक प्रश्न
जलता रहा मुझमें
तुम्हारे लिये।
78
अलमारियां अब मौन हैं
करती हैं इंतज़ार
तुम्हारे लिये।
79
आज सूनापन भी सहमा
थम गई तारीख़
तुम्हारे लिये।
80
आज गुज़रे वर्ष चार
रो पड़ा दिल
तुम्हारे लिये।
81
आज याद आए बहुत
रो पड़ा दिल
तुम्हारे लिये।
82
क़ैद हूं तन्हाइयों में
बन के साया
तुम्हारे लिये।
83
जश्न मे डूबी इबादत
कुफ्ऱ है मानो
तुम्हारे लिये।
84
चांद तुम रहना सजग
चांदनी बेकल बड़ी
तुम्हारे लिये।
85
सीप में मोती पले
दीप में ज्योति
तुम्हारे लिये।
86
हो हिमालय या समंदर
हैं सभी प्रतिमूर्ति
तुम्हारे लिये।
87
खोज डाला इत्र को
करके यूं संधान
तुम्हारे लिये।
88
देश का दर्शन बनो
गीता या क़ुरान
तुम्हारे लिये।
89
शांति की अवधारणा है
और मोहक गान
तुम्हारे लिये।
90
मुक्ति गूंजी पत्थरों से
कांप उठा ब्रह्मांड
तुम्हारे लिये।
91
शांति का बनकर मसीहा
आओ करूं आग़ाज़
तुम्हारे लिये।
92
अग्निगर्भा से उदय हो
क्रांति का अवतार
तुम्हारे लिये।
93
बेटियां सम्मान हैं और
शान भी अब
तुम्हारे लिये।
94
दिल मेरा ग़मग़ीन है
पर शब्द सूखे
तुम्हारे लिये।
95
पत्थरों मे भी नमी
दरिया में सीपी
तुम्हारे लिये।
96
हो इश्क तुम रूहानी
सज़्दा है आसमानी
तुम्हारे लिये।
97
छत मेरी खपरैल की
और सेज दरिया
तुम्हारे लिये।
98
पगडंडियां भी जंग हैं
इन बैसाखियों में
तुम्हारे लिये।
99
कुछ गुलाबी ख़तों में
इश्क ज़िंदा है
तुम्हारे लिये।
100
यादें क़ाफ़िले सी हैं
दर्द कांटों सा
तुम्हारे लिये।

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