अविनाश वाचस्पति के 100 फायकू

 

1
फेसबुक पर प्रेम मायने
प्रेमनामधारी मित्र मेरे
तुम्हारे लिये।
2
जागो फेसबुक के दीवानों
मुर्गा बोला है
तुम्हारे लिये।
3
लिखना पढ़ना सुनना सुनाना
सब लगता भला
तुम्हारे लिये।
4
हथिनी पे बिठा के
बवालमार्ट लाया हूं
तुम्हारे लिये।
5
नींद लुटी सोना लूटा
हिसाब बराबर किया
तुम्हारे लिये।
6
वे जागे हमारे लिये
हम सो रहे
तुम्हारे लिये।
7
गधे होने से अच्छा
उल्लू होना है
हमारे लिये
8
समीक्षा लेखन में कलम
अब आजमाएंगे हम
तुम्हारे लिये।
9
सो गया था मैं
नींद ने जगाया
तुम्हारे लिये।
10
चलो सोना लूटने चलें
नींद न आए
तुम्हारे लिये।
11
जाम सड़क भर लबालब
दिल खाली पगडंडी
तुम्हारे लिये।
12
अंधेरा काले धन का
उजाला मन भर
तुम्हारे लिये।
13
मोबाइल फोन के इर्द
गिर्द सब घूमें
तुम्हारे लिये।
14
गुजरना आसान है क्यों
गुजर करना मुश्किल
तुम्हारे लिये।
15
एक सप्ताह के लिये
मोबाइल फोन संन्यास
तुम्हारे लिये।
16
फेसबुक पर फायकू विधा
ने मचाया धमाल
तुम्हारे लिये।
17
फेसबुक हो रहा फायकूमय
मय मिल रही
तुम्हारे लिये।
18
फेसबुक पर खाता खोल
खोलकर पछताए हम
तुम्हारे लिये।
19
फायकू लिखूंगा अब मैं
हायकू कदापि नहीं
तुम्हारे लिये।
20
बदन दर्द बदन में
छुअन मन में
तुम्हारे लिये।
21
चलाता हूं साइकिल मैं
लाता हूं कार
तुम्हारे लिये।
22
रात में सोना अब
पड़ेगा महंगा सब
तुम्हारे लिये।
23
फेसबुक के आभासी मित्रों
बनाए ख़याली पुलाव
तुम्हारे लिये।
24-
फेसबुक नहीं सोती है
सोती है बत्ती
तुम्हारे लिये।
25-
सोना लूटने की जुगत
अपने लिये नहीं
तुम्हारे लिये।
26
फायकू फायकू काहे को
लिख रहे खायकू
तुम्हारे लिये।
27
सुबह की प्यारी नींद
नींद बने दीद
तुम्हारे लिये।
28
मदिरा पनीली लाया हंू
बीयर मिलाई है
तुम्हारे लिये।
29
मीठी मिठाई लाया हंू
रसमलाई मैं पांच
तुम्हारे लिये।
30
कार्टूनकार को ख़तरा है
फायकू बे-ख़तरा है
तुम्हारे लिये।
31
फायकूमय हुआ फेसबुक
सुंदर इसकी लुक
तुम्हारे लिये।
32
फायकू आया, फायकू आया
धूम धड़ाका मचाता
तुम्हारे लिये।
33
चार तीन दो बस
फाॅयकू बने नेक
तुम्हारे लिये।
34
आज फायकू तुम लिखो
बजाऊं मैं साज
तुम्हारे लिये।
35
होम मिनिस्टर तुम बनीं
प्राइम मिनिस्टर मैं
तुम्हारे लिये।
36
नाचती हो तुम जब
ढोल मैं बजाता
तुम्हारे लिये।
37
बुलाया मैंने जब भी
आए नहीं सब
तुम्हारे लिये।
38
ट्वीटर फेसबुक और ब्लाॅगिंग
बिन कमेंट नाकारा
तुम्हारे लिये।
39
स्ट्ेटस तुम्हारा फेस आवारा
मुझे नहीं गवारा
तुम्हारे लिये।
40
हाय क्यूं मैं अब
गायक बनूं गाऊं
तुम्हारे लिये।
41-
फेसबुक बिना फेस की
पुस्तक हो गई
तुम्हारे लिये।
42
गालियों की बढ़ी बाढ़
पीछे रही विनाशकारी
तुम्हारे लिये।
43
धूप चमक पिघलती रही
सर्दी जमती रही
तुम्हारे लिये।
44
बारिश रिमझिम बरसती रही
सर्दी बढ़ती रही
तुम्हारे लिये।
45
देखा संसद रुकी रही
चलती लगती रही
तुम्हारे लिये।
46
हंसी धन है सर्वोत्तम
निर्धन नहीं उत्तम
तुम्हारे लिये।
47
आदमी लगाए आम पेड़
बने पौधा पेड़
तुम्हारे लिये।
48
खो दिया है सोना
उड़ गई नींद
तुम्हारे लिये।
49
मौसम अखरोट हो रहा
नेता खाएं आम
तुम्हारे लिये।
50
फेसबुक पर फाॅयकू है
कमेंट सब हैं
तुम्हारे लिये।
51
बलात्कारियों डरो अब तुम
बहुत हुआ अपराध
तुम्हारे लिये।
52
बाप बना भेड़िया भुगतो
बेटा रंगा सियार
तुम्हारे लिये।
53
पत्रकार कैद न चाहें
कारपत्र में रखें
तुम्हारे लिये।
54
उम्र अपनी बता दो
पूछ रहा हूं
तुम्हारे लिये।
55
रात गहरी खाई है
अंधेरा हूं मैं
तुम्हारे लिये।
56
बयानवीर बने नेता सभी
कायर मन के
तुम्हारे लिये।
57
बात बनी जिह्वा मचली
मौन मैं रहा
तुम्हारे लिये।
58
रात जगी रात भर
परात खाली रही
तुम्हारे लिये।
59
मौसम है सर्दी का
गर्मी की धूप
तुम्हारे लिये।
60
चढ़ते हुए मैं सीढ़ियां
उतर जाता हूं
तुम्हारे लिये।
61
छान के कप में
ले रहा चुस्की
तुम्हारे लिये।
62
भगोना फिर गरमा गया
नींद उबल गयी
तुम्हारे लिये।
63
भगौना मेरा पलट गया
नींद उलट गई
तुम्हारे लिये।
64
लिखता हूं व्यंग्य मैं
अब लिखूंगा कविता
तुम्हारे लिये।
65
चलूं या सोऊं मैं
शाम को चलंू
तुम्हारे लिये।
66
फेसबुक है जन्मस्थान फायकू
हंगामा करना मकसद
तुम्हारे लिये।
67
आसा राम के दुष्कर्म
कुपुत्र करे कुकर्म
तुम्हारे लिये।
68
फेसबुक पर प्रणाम करो
फायदेमंद है प्राणायाम
तुम्हारे लिये।
69
शाम को लूटें सोना
न कोई सेना
तुम्हारे लिये।
70
आत्महत्या करूं मैं अब
अपने लिये नहीं
तुम्हारे लिये।
71
सेब हैं पांच किलो
केले दो दर्जन
तुम्हारे लिये।
72
दिवस पीछे छूट गया
लुट गई रात
तुम्हारे लिये।
73
बरसता पानी मन भर
धूप चमकाई है
तुम्हारे लिये।
74
अभी बरसात अभी धूप
सुख दुख रूप
तुम्हारे लिये।
75
चाय काफी जूस ठण्डा
रम व्हिस्की बीयर
तुम्हारे लिये।
76
निबंध व्यंग्य कविता कार्टून
पुस्तक रचूं मैं
तुम्हारे लिये।
77
धारावाहिक वीडियो यू-ट्यूब पाइपलाईन
फिल्म बनाऊं मैं
तुम्हारे लिये।
78
सर्दी कड़ाकेदार हो गई
लोकतंत्र ठिठुर रहा
तुम्हारे लिये।
79
कभी ओला हिमपात कभी,
बंजर पड़ा हूं,
तुम्हारे लिये।
80
फायकूमय फेसबुक हमारा, बना
फेसबुकियों का सहारा
तुम्हारे लिये।
81
सोऊं कि रोऊं मैं
आंखों को धोऊं
तुम्हारे लिये।
82
मौसम बरफ हो रहा
बरफी हो जाये
तुम्हारे लिये।
83
करतूतें महाबालिग की करूं
मैं बालिग हूं
तुम्हारे लिये।
84
देख उतरे औक़ात पर
आपकी झाडू करामाती
तुम्हारे लिये।
85
बरसात में ओढ़ी छतरियां
शहर बसाए हमने
तुम्हारे लिये
86
टोपी झाडू बनी ताकतवर
बदल डाली सरकार
तुम्हारे लिये।
87
भैंस के आगे ताली
उड़ते नहीं मच्छर
तुम्हारे लिये।
88
बेईमानी बनी बेअसर अब
ईमानदारी मनाए खैर
तुम्हारे लिये।
89
रिश्वत से हटा मोह
स्टिंग हो रहे
तुम्हारे लिये।
90
चाय बेच रहे पीएम
बनने को आतुर
तुम्हारे लिये।
91
आप से बढ़कर आप
ताप बना संताप
तुम्हारे लिये।
92
आप आए बहार आई
सरकार बन आई
तुम्हारे लिये।
93
सरकती रही उमर मेरी
सोचता रहा सब
तुम्हारे लिये।
94
आपसे रचना मिली है
लिखी किसने है
तुम्हारे लिये।
95
धरना पड़ेगा धन हां
धरती पर अब
तुम्हारे लिये।
96
आपको लाया पब्लिक विश्वास
किया तुमने विश्वासघात
तुम्हारे लिये।
97
सड़क पर मंतरी मारे
पुराना मंतरी कांपे
तुम्हारे लिये।
98
करी कोशिश दिखी औकात
भगा नहीं सके
तुम्हारे लिये।
99
दिखाई औकात घूंसा लात
दिखी असली जात
तुम्हारे लिये।
100
रामलीला फिल्मी नहीं इमली
विवाद करा गई
तुम्हारे लिये।

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