डाॅ. अनिल शर्मा ‘अनिल’ के 100 फायकू

 

1
ख़ुद बनाएं हैं हमने
ये चाय पकौड़े,
तुम्हारे लिये।
2
एक मिलन आस में
सब काम छोड़ें
तुम्हारे लिये।
3
साथ मिल जाए बस
संग संग दौड़े
तुम्हारे लिये।
4
थक गये मित्र तुम,
तो मंगवाएं घोड़े
तुम्हारे लिये।
5
अपनी भरपूर है व्यस्तता
क्षण हैं थोड़े
तुम्हारे लिये।
6
गुनगुनाओ मेरे संग प्रिये
रचे गीत सारे
तुम्हारे लिये।
7
ईश्वर ने रची प्रकृति
ये चंदा तारे
तुम्हारे लिये।
8
फूल भंवरे और तितलियां
ये प्यारे प्यारे
तुम्हारे लिये।
9
पर्वतों से घिरी घाटियां
ये नदिया धारे
तुम्हारे लिये।
10
छा गये आकाश में,
घन ये कारे
तुम्हारे लिये।
11
नित्य दर्शन करूं रामजी
दर पे आऊं
तुम्हारे लिये।
12
सामने बैठकर एक भजन
मन से गाऊं
तुम्हारे लिये।
13
अवसर सेवा करने का,
यूं ही पाऊं
तुम्हारे लिये।
14
भोग प्रसाद सेवा हित
फल मैं लाऊं
तुम्हारे लिये।
15
मेला देखो भरा हुआ
सब खेल खिलौने
तुम्हारे लिये।
16
यह सरकस, तमाशा, नौटंकी
नर्तकी और बौने
तुम्हारे लिये।
17
टिकिया, समोसे, जलेबी भरे
ये पत्ते-दोने
तुम्हारे लिये।
18
कूकर, कड़ाही, तवा, चिमटा,
ये कटोरी भगौने
तुम्हारे लिये।
19
कालीन, दरियां, कंबल, रिजाई
ये चादर बिछौने
तुम्हारे लिये।
20
संग मिल बैठना चाहते
पार्टी का बहाना
तुम्हारे लिये।
21
बिन तुम्हारे रहे अनमना
ये दिल दीवाना
तुम्हारे लिये।
22
धड़कने दिल की सुनना
गा रही तराना
तुम्हारे लिये।
23
साथ अपना रहेगा बना
सारा हंसना हंसाना
तुम्हारे लिये।
24
सुनो राधिके बांसुरी बोलती
श्याम करता प्रतीक्षा
तुम्हारे लिये।
25
आ रहीं सांवरे मैं
बांसुरिया को सुन
तुम्हारे लिये।
26
योजनाएं सभी जनहित में
लागू करता शासन
तुम्हारे लिये।
27
बाघ बस्ती में आए
डरे मेरा मन
तुम्हारे लिये।
28
लड्डू, पूरी और मिठाई
रसगुल्ले संग बालूशाही
तुम्हारे लिये।
29
धूम धड़ाका, बाजा गाजा
आया बांका दूल्हा राजा
तुम्हारे लिये।
30
दूल्हा दुल्हन परिवार समूचा
करता मंगल पूजा
तुम्हारे लिये।
31
रिश्ता, तिलक, सगाई, बधाई
चढ़त बारात विदाई
तुम्हारे लिये।
32
हल्दी मेहंदी मंगल कारज
खूब सजावट सज-धज
तुम्हारे लिये।
33
पर्वत, नदियां, झरने, वन
शांतिपूर्ण यह वातावरण
तुम्हारे लिये।
34
ऊंचे लंबे वृक्ष सघन
मानो योगी तपस्यारत
तुम्हारे लिये।
35
भरो उड़ान फैलाकर पर
विशाल नीला अंबर
तुम्हारे लिये।
36
कल कल छल छल
नदिया का जल
तुम्हारे लिये।
37
आम की यह फसल
इसके मीठे फल
तुम्हारे लिये।
3
पहुंच से हैं दूर
इसलिये खट्टे अंगूर
तुम्हारे लिये।
39
बंगला, गाड़ी, साड़ी, जेवर,
सुंदर सा घर
तुम्हारे लिये।
40
कीर्तन, व्रत, पूजा, हवन
शांति करते मन
तुम्हारे लिये।
41
मत करो आंख नम
आ गये हम
तुम्हारे लिये।
42
उसको कुछ भी कहो
हुआ वह दीवाना
तुम्हारे लिये।
43
रिश्तों में सदा विश्वास
हृदय में प्यार
तुम्हारे लिये।
44
एक बार तो मुस्काओ
जाएंगे सब हार
तुम्हारे लिये।
45
होगी नहीं शिकायत कोई,
छोड़ें सभी विकार
तुम्हारे लिये।
46
प्रीत की निराली रीत
दीवानी गाती गीत
तुम्हारे लिये।
47
आ जाओ रे मनमीत
प्रतीक्षा में प्रीत
तुम्हारे लिये।
48
वक्त रुकता कब भला
हम रुके हैं
तुम्हारे लिये।
49
डालियों पर भरपूर फल
तरु झुके हैं
तुम्हारे लिये।
50
सारे दीवाने दीदार को
आ चुके हैं
तुम्हारे लिये।
51
भाइयों ने तेरे मारा
हम ठुके है
तुम्हारे लिये।
52
टूटा अपना बेचारा दिल
और फुंके हैं
तुम्हारे लिये।
53
कोई असुविधा न हो,
कोशिशें अपनी सारी
तुम्हारे लिये।
54
खुश रहो हर समय
श्रम निरंतर जारी
तुम्हारे लिये।
55
मुस्कराते हुए बोली दो
होंगे सब आभारी
तुम्हारे लिये।
56
करते ईश्वर से प्रार्थना
सभी नर नारी
तुम्हारे लिये।
57
चाल हिरनी सी देखकर
हुआ मन शिकारी
तुम्हारे लिये।
58
भीगना मत बरसात में
लो यह छाता
तुम्हारे लिये।
59
जाड़े मौसम ठंडक वाला
लो स्वेटर, मफलर
तुम्हारे लिये।
60
ख़ुद बनायी है हमने
यह स्पेशल चाय
तुम्हारे लिये।
61
ये टोपी ये जूते
हमने ही मंगवाएं
तुम्हारे लिये।
62
मन तो चाहता बहुत
कर न पाएं
तुम्हारे लिये।
63
गोला बादाम खीर में
इलाइची व मुनक्का
तुम्हारे लिये।
64
इनको खाओ स्वादिष्ट है
संग खाना पक्का
तुम्हारे लिये।
65
भीड़ बेकाबू होने लगी
हो गयी धक्कम धक्का
तुम्हारे लिये।
66
इसको रखना संभाले हुए
लो यह सिक्का
तुम्हारे लिये।
67
गांव की दूरी बहुत
कर लिया इक्का
तुम्हारे लिये।
68
दिल से एकबार पुकारो
झट दौड़ा आऊं
तुम्हारे लिये।
69
लिस्ट वाट्सएप कर दीजिए
सामान घर भिजवाऊं
तुम्हारे लिये।
70
आॅनलाइन सब मिल रहा
माल सारे बिकाऊ
तुम्हारे लिये।
71
ख़ुशबू वाला साबुन रगड़
रोज ही नहाऊं
तुम्हारे लिये।
72
एक दिन चमकेगी किस्मत
ऐसा नंबर पाऊं
तुम्हारे लिये।
73
बनावट बुनावट कोई नहीं
सच, सच बोला
तुम्हारे लिये।
74
रोली अक्षत पुष्प सुगंधि
और एक गोला
तुम्हारे लिये।
75
मैंने ख़ुद ही पकाया
चावल संग छोला
तुम्हारे लिये।
76
मन की सुनिए जरा
हृदय द्वार खोला
तुम्हारे लिये।
77
बात कहने से पहले
शब्द शब्द तोला
तुम्हारे लिये।
78
सुनो, हंस दो ज़रा
ये चूरन, टाॅफी
तुम्हारे लिये।
79
बैठो बतियाए दो पल
यूं मंगवाई काॅफी
तुम्हारे लिये।
80
पढ़के दो शब्द लिखना
ये किताब छापी
तुम्हारे लिये।
81
दीदार की आस में
कितनी दूरी नापी
तुम्हारे लिये।
82
काम केवल इतना किया
ग़लतियां कई ढापी
तुम्हारे लिये।
83
घर के सभी लोग
और ये मुहल्ला
तुम्हारे लिये।
84
रैन दिवस सेवा में
हाज़िर ये निठल्ला
तुम्हारे लिये।
85
इसको पहनकर देख लो
ये अंगूठी छल्ला
तुम्हारे लिये।
86
इसको चूहे खाएं नहीं
लो संभालो गल्ला
तुम्हारे लिये।
87
बहना भाई चाची ताई
लल्ली और लल्ला,
तुम्हारे लिये।
88
मीठे शब्दों से भरी
मनभावन ये बातें
तुम्हारे लिये।
89
ये नटखट से दिन
सुहानी ये रातें
तुम्हारे लिये।
90
वो चंदा में बुढ़िया
दिखी सूत काते,
तुम्हारे लिये।
91
कुछ किस्से पुराने फिर
सुनें और सुनाते
तुम्हारे लिये।
92
तुम पर लिखी जो
वो ग़ज़ल गुनगुनाते
तुम्हारे लिये।
93
हरी बेल तालाब की,
मीठे कच्चे सिंघाड़े,
तुम्हारे लिये।
94
रेबड़ी, मूंगफलियां, तिल, ग़ज़क
ले आये जाड़े
तुम्हारे लिये।
95
ठंड में किटकिटाते हुए
दांत रटते पहाड़े
तुम्हारे लिये।
96
जीत ली कबड्ड़ी फिर
झंडे नये गाड़े
तुम्हारे लिये।
97
जीतते ही रहे बाज़ियां
हमने कितने पछाड़ें
तुम्हारे लिये।
98
राह की बाधाएं हटी
हमने पत्थर उखाड़े
तुम्हारे लिये।
99
इनका उपयोग किया करो
ये सारे सुविधा
तुम्हारे लिये।
100
सब तुम्हारा, तुम्हारा ही
न कोई दुविधा
तुम्हारे लिये।

One thought on “डाॅ. अनिल शर्मा ‘अनिल’ के 100 फायकू”

  1. सौ फायकू लिखे आपने
    मुश्किल नही है
    तुम्हारे लिए।

    हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ
    हमारी ओर से
    तुम्हारे लिए।

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