रश्मि अभय के 100 फायकू

 

1
ज़िंदगी की सारी तमन्नाएं
मेरी हर आरज़ू
तुम्हारे लिये।
2
मेरा ये रूप शृंगार
मेरा सजना संवरना
तुम्हारे लिये।
3
ग़म से ना घबराना
खुशियां मेरी सारी
तुम्हारे लिये।
4
तुम मेरी पूरी क़िताब
मैं एक पन्ना
तुम्हारे लिये।
5
ज़िंदगी का रास्ता तुम
मैं एक राही
तुम्हारे लिये।
6
भूल जाओगे गर मुझे
ख़ामोश हो जाऊंगी
तुम्हारे लिये।
7
कभी शिक़वा नहीं किया
ज़हर भी पिया
तुम्हारे लिये।
8
ज़िंदगी की राहों में
साथ साथ चलेंगे
तुम्हारे लिये।
9
जिन राहों पर चलो
उनपर फूल बिछाऊं
तुम्हारे लिये।
10
दर्द दिल में दबाये
जिया किए हम
तुम्हारे लिये।
11
जी भर के रोये
हर दर्द छुपाया
तुम्हारे लिये।
12
तुम को क्या बतलाएं
कितने ज़ुल्म उठाए
तुम्हारे लिये।
13
तुम आसमां के चांद
मैं एक ज़र्रा
तुम्हारे लिये।
14
आंसुओं को पी कर
हर ज़ख़्म सहलाया
तुम्हारे लिये।
15
दर्द के अंधेरों में
मैं हूं रश्मि
तुम्हारे लिये।
16
ना चांदनी ना रागिनी
मैं हूं संगिनी
तुम्हारे लिये।
17
तुम साथ चलो मेरे
मैं हूं मंज़िल
तुम्हारे लिये।
18
क़दम हो साथ मेरे
रास्ता हो आसां
तुम्हारे लिये।
19
ज़ज़्ब कर रखा है
हर ग़म को
तुम्हारे लिये।
20
तुम दरिया मैं मौज़
तुममें मिलना है
तुम्हारे लिये।
21
सागर का हर किनारा
समा गया मुझमें
तुम्हारे लिये।
22
सागर से जा मिली
बलखाती ये नदी
तुम्हारे लिये।
23
तुम एक खुबसूरत तस्वीर
मैं एक चित्रकार
तुम्हारे लिये।
24
ज़हर ये दर्द-ओ-गम का
पी लिया मैंने
तुम्हारे लिये।
25
आंखों में कोई ख़्वाब
नहीं पलते अब
तुम्हारे लिये।
26
मेरी दुआओं में शामिल
एक दुआ है
तुम्हारे लिये।
27
हंसती मुस्कराती ये ज़िंदगी
और उसकी सदाएं
तुम्हारे लिये।
28
पलकों के चिलमन से
ख़्वाब कई देखें
तुम्हारे लिये।
29
तुझपर ना धूप आए
साया बन जाऊं
तुम्हारे लिये।
30
खुशियों ने छेड़ी तान
सुबह गुनगुना रही
तुम्हारे लिये।
31
प्रेम कलश छलक रहा है
इस अन्तर्मन में
तुम्हारे लिये।
32
जीवन की हर पीड़ा
दबा रखी है
तुम्हारे लिये।
33
ममता का ये सागर
उमड़ रहा है
तुम्हारे लिये।
34
तुझ को आबाद किया
ख़ुदको बर्बाद किया
तुम्हारे लिये।
35
रौशन महफ़िल हुआ किए
अंधेरों में भटके
तुम्हारे लिये।
36
तन मन धन सब
सौंप दिया है
तुम्हारे लिये।
37
तू एक गहरा सागर
मैं बनूं किनारा
तुम्हारे लिये।
38
ज़मीं से आसमां तक
भटका किए हम
तुम्हारे लिये।
39
छोड़ बाबुल का घर
चली आई मैं
तुम्हारे लिये।
40
पहचान दी है अपनी
नाम देके अपना
तुम्हारे लिये।
41
शमा जलाए बैठे हैं
अंधेरी राहों में
तुम्हारे लिये।
42
मेरे दिल का दर्द
बन गई खुशी
तुम्हारे लिये।
43
मेरी नींद मेरे ख़्वाब
अब सबकुछ है
तुम्हारे लिये।
44
मिटना ही नसीब है
तो मिट जायेंगे
तुम्हारे लिये।
45
इस दिल से पुछो
क्यूं धड़कता है
तुम्हारे लिये।
46
थकन पाओं में लिये
चलते रहे हैं
तुम्हारे लिये।
47
सज़दे में सर झुकाया
परस्तिस की है
तुम्हारे लिये।
48
तेज़ रफ़्तार राहें भी
रुकी हुई हैं
तुम्हारे लिये।
49
हम दिल का दीया
जलाए बैठे हैं
तुम्हारे लिये।
50
ख़ुद को बर्बाद किया
नया आग़ाज़ किया
तुम्हारे लिये।
51
तुम्हारा प्यार गहरा सागर
मैं निर्मल नदी
तुम्हारे लिये।
52
बेटी एक अनमोल रत्न
देती हर कुर्बानी
तुम्हारे लिये।
53
बहू होती बेटी समान
पीहर छोड़ आती
तुम्हारे लिये।
54
ज़माने की हर रवायतें
तोड़ी हैं मैंने
तुम्हारे लिये।
55
जिधर देखूं तुम्हें देखूं
नज़रें हैं मेरी
तुम्हारे लिये।
56
दिल की हर धड़कन
आवाज़ देती है
तुम्हारे लिये।
57
सारी दुश्वारियों के बाद
ज़िंदा हूं मैं
तुम्हारे लिये।
58
जुदा होके जाना मैंने
मैं क्या थी
तुम्हारे लिये।
59
तुम मुझे भूल जाओगे
कितना मुश्किल है
तुम्हारे लिये।
60
शबा ख़ैर कहते हैं
सुकून भरी नींद
तुम्हारे लिये।
61
तुम जो कह दो
तारे तोड़ लाऊं
तुम्हारे लिये।
62
मंदिर की ये ध्वनियां
दुआएं ला रही हैं
तुम्हारे लिये।
63
खिलखिला रही है ज़िंदगी
हर मोड़ पर
तुम्हारे लिये।
64
ये मासूम सी मुस्कान
लबों पर है
तुम्हारे लिये।
65
ये सारे दर्दों अलम
सह लूंगी मैं
तुम्हारे लिये।
66
वफ़ा की सख़्त राहें
तय कर लूंगी
तुम्हारे लिये।
67
ज़मीं से आसमां तक
सारे नज़ारे हैं
तुम्हारे लिये।
68
तुम जो मुस्कुरा दो
ज़ख़्मों को सहलाऊं
तुम्हारे लिये।
69
वफ़ा की राहों में
कांटों को चुनूं
तुम्हारे लिये।
70
सूर्य की हर किरण
तम को भगाए
तुम्हारे लिये।
71
रश्मि हूं सूरज की
मगर जलती हूं
तुम्हारे लिये।
72
एक दर्द जगा है
दिल के अंदर
तुम्हारे लिये।
73
जा रहे हो कहां
मंज़िल यहीं है
तुम्हारे लिये।
74
मैं शमा महफ़िल की
हर रात जली
तुम्हारे लिये।
75
यूं ना जाओ छोड़कर
मर जाऊंगी मैं
तुम्हारे लिये।
76
दीया संग जैसे बाती
वैसी हूं मैं
तुम्हारे लिये।
77
तारों का ये कारवां
हमेशा साथ हैं
तुम्हारे लिये।
78
चांद तारे फूल खुशबू
ये सारे नज़ारे
तुम्हारे लिये।
79
सांसों का ये काफ़िला
रुका है सिर्फ़
तुम्हारे लिये।
80
देखूं तुम्हारी भोली सूरत
आंखें हैं मेरी
तुम्हारे लिये।
81
सूर्य की ये रश्मि
जलती है मगर
तुम्हारे लिये।
82
ग़र तुम आईना बनो
शृंगार करूं मैं
तुम्हारे लिये।
83
सुन मेरे महबूब सुन
जिंदा हूं मैं
तुम्हारे लिये।
84
ज़हर का हर घूंट
पिया है मैंने
तुम्हारे लिये।
85
मैं सूर्य की किरण
जलती बुझती रहती
तुम्हारे लिये।
86
दुआ है ये हमारी
चांद रौशन रहे
तुम्हारे लिये।
87
खुशियों ने छेड़ी तान
सुबह गुनगुना रही
तुम्हारे लिये।
88
सूर्य की रश्मियां आईं
इंद्रधनुषी रंगो में
तुम्हारे लिये।
89
लिखूं दो चार फायकू
बने एक कविता
तुम्हारे लिये।
90
एक दो तीन चार
सब पंक्तियां हैं
तुम्हारे लिये।
91
पल पल झरते झरने
बने आंसू मेरे
तुम्हारे लिये।
92
ख़्वाब देखूं ख़्वाब सजाऊं
दुनिया रंगीन बनाऊं
तुम्हारे लिये।
93
रात दिन सुबह शाम
करती हूं प्रार्थना
तुम्हारे लिये।
94
कविता कहानी गीत ग़ज़ल
बता क्या लिखूं
तुम्हारे लिये।
95
धूप ओढूं कि छांव
क्या क्या ओढूं
तुम्हारे लिये।
96
यहां वहां जहां तहां
सब जगह भटकूं
तुम्हारे लिये।
97
दुनिया वीरान सही मगर
मैं सजूं संवरूं
तुम्हारे लिये।
98
तुम आओ महबूब मेरे
करूं दीया बाती
तुम्हारे लिये।
99
देव तुम छोड़ गए
मैं कैसे जिऊं
तुम्हारे लिये।
100
हंसना रोना सब समर्पित
मैं हुई विरक्त
तुम्हारे लिये।

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