साहित्य

व्यंग्य साहित्य

भईया जी और सोशल मीडिया

  अनिल शर्मा ‘अनिल’ भईया जी को अहम और वहम दोनों का ही मीनिया है। अहम इस बात का कि सोशल मीडिया किंग कहने लगे है लोग और वहम इस बात का कि इनसे अच्छा और बड़ा साहित्यकार कोई नहीं है। अपनी मस्ती में, पूरी बस्ती में भईया जी लंबा कुर्ता और चैड़ा पायजामा पहने […]

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कविता

सोशल मीडिया

  जब से आया है मोबाइल, बदला है ये जमाना देश विदेश की बातों को, घर बैठे हमने जाना भूले हैं सभ्यता को, भूले हैं संस्कृति को ॥ दुनिया भर की बातें सीखीं, भूल गये अपनापन सारा समय फोन को देते, अपनों से बिछड़े हम बात न घर में करते, चैट लोगों से करते॥ ज्ञान […]

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कहानी

मुझे फोन कर देना

प्रवासी पंजाबी कहानी   मूल – रविंदर सिंह सोढी अनु – प्रो. नव संगीत सिंह शिफाली ने मोबाइल का अलार्म बंद कर दिया। शनिवार का का दिन था, इसीलिए वह देरी से उठी। कोरोना के कारण जब से उसने घर से आॅफिस का काम करना शुरू किया था, तब से वह सुबह देर से ही […]

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व्यंग्य

सतयुग आ गया

  डाॅ. दलजीत कौर कल पड़ोसी प्रेमचंद जी ने बताया -सतयुग आ गया। जिस सतयुग की तलाश महापुरुषों को थी। जिस के लिए संत तपस्या कर रहे थे। जिसका वर्णन केवल धर्म-ग्रंथों में था। वह आ गया। आकाश साफ, नदियाँ नीली, जल, वायु, पृथ्वी प्रदूषण रहित हो गए। चिड़ियाँ लौट आईं हैं। जीव-जंतु खुशी से […]

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व्यक्तित्व

हल्का होने का अहसास : मिलान कुंदेरा

श्रद्धांजलि लेख   प्रो. गोपाल शर्मा   “और जल्दी ही युवती सिसकी लेने के बजाय ज़ोर–ज़ोर से रोने लगी और वह यह करुणाजनक पुनरुक्ति दोहराती चली गई, ”मैं मैं हूँ, मैं मैं हूँ, मैं मैं हूँ ….” आज जब अचानक मिलान कुंदेरा के निधन का समाचार सुना तो उनकी एक कहानी के अनुवाद की ये अंतिम पंक्तियाँ याद […]

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कविता

सिसक रही सदी लिखो कवि/आदित्य आजमी

    ग़ज़ल सिसक रही सदी लिखो कवि, सूख रही है नदी लिखो कवि! नेकी का तो पतन हो रहा है, बढ़ रही है बदी लिखो कवि! किसी दिन घर को गिरा देगी, ये बुनियादी नमी लिखो कवि! मंगल पर जाने की तैयारी है, कम पड़ती जमीं लिखो कवि! आधुनिकता के इस काल मे, गुम […]

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व्यक्तित्व

महान थे स्वामी विवेकानंद

निर्वाण दिवस पर शत्-शत् नमन कुमार कृष्णन स्वामी विवेकानंद के विचार और साधना में योग विद्या का बहुआयामी समन्वय है। ज्ञान, कर्म और भक्ति की त्रिवेणी उनके व्यक्तित्व से अविरल प्रवाहित होती है और राजयोग की पराकाष्ठा उनके जीवन को सूर्य की भांति दीप्तिमान बनाती है। विवेकानंद की मान्यता में ‘अहं ब्रह्मास्मि’ की मौलिक धारणा […]

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व्यंग्य साहित्य

टमाटर को बुखार!

  ✍️ ऋषभदेव शर्मा पूरे भारत में टमाटर की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी चिंता का कारण है। कुछ स्थानों पर टमाटर की कीमत दोगुनी से भी अधिक हो गई है, जिससे आम लोगों के लिए टमाटर खरीदना मुश्किल हो गया है। शुक्र है कि आम चुनाव अभी दूर है वरना टमाटर का यह बुखार कभी […]

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पुस्तक समीक्षा

‘नौकरस्याही के रंग’ पुस्तक जो जोड़ती है अपने से

डॉ. कन्हैया त्रिपाठी पुस्तकें मनुष्य की कई पहेलियों को शांत कर देती हैं और पाठक पर अपनी एक नई छाप छोड़ देती हैं, बस पाठ करने वाला व्यक्ति उसकी संवेदना को मनोयोग से समझ भर पाए। लेखक की संवेदना को पकड़ पाए। पुस्तक जिस भावभूमि पर रची जाती है, उसे पाठक तभी उसी रूप में […]

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कहानी साहित्य

मौन

अमन कुमार बूढ़ा मोहन अब स्वयं को परेशान अनुभव कर रहा था। अपने परिवार की जिम्मेदारी उठाना अब उसके लिए भारी पड़ रहा था। परिवार के अन्य कमाऊ सदस्य अपने मुखिया मोहन की अवहेलना करने लगे थे। मोहन की विधवा भाभी परिवार के सदस्यों की लगाम अपने हाथों में थामे थी। वह बड़ी चालाक थी। […]

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